असली बिक्री के दाम, माँगे गए नहीं
महारानी विक्टोरिया के सिक्के की असली कीमत क्या है?
उनका कोई सिक्का आज मुद्रा नहीं है, इसलिए कीमत वही है जो कोई संग्रहकर्ता उस किस्म और उस हालत के लिए दे — और आम तारीख़ वाला घिसा सिक्का कितना भी पुराना हो, सस्ता ही रहता है।
उनका शासन 1901 में ख़त्म हुआ, इसलिए इस पन्ने का हर सिक्का सौ साल पार कर चुका है:
हर सिक्का कितने में बिका
| सिक्का | पूरी बिक्री | बीच का दाम | आधी बिक्रियाँ इनके बीच |
|---|---|---|---|
| पाव आना सिक्का · Victoria Empress · 1890s | 8 | ₹270 | ₹144–₹349 |
| पाव आना सिक्का · Victoria Queen · 1860s | 6 | ₹185 | ₹143–₹326 |
| पाई सिक्का · Victoria Empress · 1890s | 4 | ₹525 | ₹405–₹644 |
| आधा पैसा सिक्का · Victoria Queen · 1860s | 4 | ₹365 | ₹273–₹563 |
| ₹1 सिक्का · Victoria Queen · 1870s | 3 | ₹4,500 | ₹3,100–₹5,060 |
हर पंक्ति एक किस्म का सिक्का — जहाँ बेचने वाले ने साल लिखा, वहाँ एक दशक का — और कम से कम 3 बिक्रियों पर। 4 से कम हों तो आख़िरी कॉलम सबसे कम और सबसे ऊँची बिक्री है, और जहाँ दाम आपस में पाँच गुना से ज़्यादा अलग हैं वहाँ बीच का दाम नहीं दिया गया।
Queen या Empress, और क्या देखें
- Queen या Empress। उनके चेहरे वाले जिन सिक्कों पर 1840 से 1876 की तारीख़ है, उन पर “VICTORIA QUEEN” लिखा है। 1 जनवरी 1877 को उन्हें भारत की साम्राज्ञी (Empress of India) घोषित किया गया, और 1877 से 1901 की तारीख़ वाले सिक्कों पर “VICTORIA EMPRESS” लिखा है। तालिका दोनों को अलग रखती है, क्योंकि ये अलग सिक्के हैं।
- कंपनी या ताज। 1840 की तारीख़ वाले उनके शुरुआती भारतीय सिक्कों के पीछे अब भी “EAST INDIA COMPANY” लिखा है; 1862 या उसके बाद की तारीख़ वाले सिक्कों पर “INDIA” लिखा है।
- चाँदी और ताँबा। रुपया, अठन्नी, चवन्नी और दो आना चाँदी के हैं — एक रुपये में 10.69 ग्राम शुद्ध चाँदी है। 1/12 आना, आधा पैसा, पाव आना और आधा आना ताँबे के हैं; इन पर उनका चेहरा 1862 की तारीख़ से आता है। उससे पहले की तारीख़ वाले ताँबे के सिक्कों पर रानी नहीं, कंपनी का कुल-चिह्न है — वे कंपनी के सिक्के हैं। पुराने सिक्कों में कितनी चाँदी है →
- एक तारीख़, कई साल। ठप्पों पर एक ही तारीख़ सालों चल सकती थी — 1840 का रुपया इसकी सबसे जानी-मानी मिसाल है — इसलिए आम तारीख़ वाला सिक्का दुर्लभ नहीं होता।
विक्टोरिया के सिक्के ऑनलाइन इतने महँगे क्यों दिखते हैं
महारानी विक्टोरिया के सिक्कों की लिस्टिंग रोज़ लाखों में लगती है, और लिस्टिंग सिर्फ़ बेचने वाले की उम्मीद होती है। इस पन्ने का हर आँकड़ा उसकी जगह पूरी हुई बिक्री है। माँगा और बिका अलग क्यों है →
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दाम: महारानी विक्टोरिया के सिक्कों की वे बिक्रियाँ जो स्वतंत्र सिक्का दुकानों पर पूरी हुईं, 2026-10-21 तक। माँगे गए दाम इनमें नहीं मिलाए गए, और कोई बिक्री दो बार नहीं गिनी गई। कोई सिक्का यहाँ तभी गिना गया जब बेचने वाले ने शासक का नाम लिखा; सिर्फ़ साल से अंदाज़ा लगाकर कोई सिक्का नहीं जोड़ा गया, ताकि आँकड़े अनुमान न बनें।
विक्टोरिया के सिक्के के लिए आपसे फ़ीस माँगी जा रही है?
विक्टोरिया के रुपये के लिए “विदेश का ख़रीदार” इस ठगी का सबसे पुराना रूप है, और फ़ीस export या clearance के नाम से आती है। असली ख़रीदार बेचने वाले से कभी पैसे नहीं माँगता।
यह ठगी कैसे चलती है