Diwali Safai Me Mile Sikke-Note
Purane sikke aur note mile? क्या करें, क्या न करें
दिवाली की सफ़ाई में दराज़ या पुराने बक्से से सिक्के-नोट निकलें, तो सीधा जवाब यह है: जो आम सिक्का या नोट आज भी चलता है, वह उतने का ही है जितना उस पर लिखा है; और चवन्नी तक के पैसे या आने जैसे बंद हो चुके सिक्के आम तौर पर दसियों से कुछ सौ रुपये में बिकते हैं — लाखों में नहीं। उन्हें साफ़ मत कीजिए, पहले छाँटिए, असली बिक्री का दाम देखिए, और जो ख़रीदार पहले आपसे पैसा माँगे, उससे बात वहीं ख़त्म कीजिए।
पहले: साफ़ या पॉलिश मत कीजिए
पुराने सिक्के कैसे साफ़ करें? सीधा जवाब: मत कीजिए। American Numismatic Association (ANA) के FAQ में “क्या मैं अपने सिक्के साफ़ करूँ?” का छोटा जवाब है: “नहीं!” ANA के मुताबिक़ ग़लत तरीक़े से साफ़ किए गए सिक्के अक्सर अपनी कीमत खो देते हैं, कई बार आधी से भी ज़्यादा। सिक्कों की ग्रेडिंग करने वाली कंपनी NGC ग़लत तरीक़े से साफ़ किए गए सिक्के को 1 से 70 वाला नंबर-ग्रेड नहीं देती, और कहती है कि सफ़ाई को वापस नहीं किया जा सकता। इमली, नींबू, टूथपेस्ट या ब्रश से रगड़ना भी सफ़ाई ही है — सिक्का जैसा मिला है, वैसा ही रहने दीजिए। नोट को इस्त्री मत कीजिए, धोइए मत और टेप मत लगाइए: नोटों की ग्रेडिंग करने वाली PMG “EPQ” (पूरी तरह असली काग़ज़) का दर्जा उसी नोट को देती है जिसे दबाकर, धोकर या किसी और तरीक़े से बेहतर दिखाने की कोशिश न हुई हो। सिक्के और नोट सीधे और सूखी जगह रखिए, और नरम, तेज़ गंध वाली प्लास्टिक (PVC) की थैली में लंबे समय तक मत रखिए — ANA के मुताबिक़ PVC समय के साथ टूटकर एसिड छोड़ता है, जो सिक्के पर हरी चिपचिपी परत बना देता है। जो आम सिक्का या नोट आज भी चलता है, उसके लिए यह सब मायने नहीं रखता — वह अपने अंकित मूल्य का ही है।
फिर छाँटिए: आपके हाथ में असल में क्या है
- जो आज भी चलता है, वह आम तौर पर अंकित मूल्य का है। RBI के FAQ के अनुसार 50 पैसे, ₹1, ₹2, ₹5, ₹10 और ₹20 के सिक्के legal tender (क़ानूनी मुद्रा) हैं — यानी अठन्नी आज भी पैसा है। ₹10 के सिक्के के सभी डिज़ाइन legal tender हैं; वह बंद नहीं हुआ। आज चलने वाले आम नोट भी उतने के ही हैं जितना उन पर लिखा है। सिर्फ़ कुछ ख़ास किस्मों (जैसे कुछ स्मारक सिक्कों या ख़ास सीरियल वाले नोटों) की कलेक्टर कीमत होती है, और वह भी सैकड़ों से कुछ हज़ार रुपये तक — लाखों में नहीं। देखिए सिक्कों की असली कीमत, ₹5 का सिक्का, ₹10 का सिक्का और नोटों की असली कीमत।
- चवन्नी और उससे छोटे सिक्के अब क़ानूनी मुद्रा नहीं हैं। 25 पैसे और उससे छोटे सिक्के 30 जून 2011 से legal tender नहीं रहे; बैंक और RBI इन्हें 29 जून 2011 तक ही बदलते थे। अब इनकी कीमत बस उतनी है जितनी कोई कलेक्टर दे। पुराने पैसे के सिक्कों की 172 दर्ज बिक्रियों में — जिनमें 1970 और 1980 के दशक की पुरानी अठन्नियों की 51 बिक्रियाँ भी हैं — बीच का दाम (median), सिक्के और दशक के हिसाब से, लगभग ₹37 से ₹175 रहा। पैसे के सिक्कों की कीमत →
- आने, पाई और पुराने पैसे (pice) के सिक्के अब legal tender नहीं हैं, इसलिए इनका कोई अंकित मूल्य नहीं बचा — कलेक्टर जो दे, वही इनकी कीमत है। कलेक्टर इनके लिए सचमुच पैसे देते हैं, पर दसियों से कुछ सौ रुपये, लाखों नहीं: 62 दर्ज बिक्रियों में बीच का दाम सिक्के के हिसाब से लगभग ₹58 से ₹280 रहा। कीमत उम्र से नहीं, इस बात से तय होती है कि कितने कम ढले और कितने बिना घिसे बचे। आने के सिक्कों की कीमत →
- “1818 East India Company” वाला हनुमान सिक्का असली सिक्का नहीं, आज का बना टोकन है — स्वतंत्र सिक्का दुकानों की जो पूरी हुई बिक्रियाँ हम दर्ज करते हैं, उनमें ऐसा एक भी टुकड़ा नहीं है। ईस्ट इंडिया कंपनी के असली ताँबे के सिक्कों की 24 पूरी हुई बिक्रियों में बीच का दाम ₹450 रहा। पहचान कैसे करें →
- चाँदी के सिक्के। 1835 से 1939 तक के चाँदी के रुपये में 10.69 ग्राम शुद्ध चाँदी है, और ऐसे रुपयों की 33 पूरी हुई बिक्रियों में बीच का दाम ₹4,200 रहा। 1940–45 के रुपये में 5.83 ग्राम चाँदी है, और 1946–47 का रुपया चाँदी का है ही नहीं — वह शुद्ध निकल का है। घर पर दो जाँच: 1835–1939 का रुपया रसोई के तराज़ू पर लगभग 11.66 ग्राम का होता है (घिसा हुआ थोड़ा कम), और चुंबक उसे नहीं खींचता, जबकि शुद्ध निकल के सिक्के को खींचता है। पर चुंबक बस निकल या स्टील को पकड़ता है: न चिपकना चाँदी होने का सबूत नहीं — ताँबा-निकल और पीतल के सिक्के भी नहीं चिपकते — और कीमत या “शक्ति” तो वह बताता ही नहीं। चाँदी के सिक्कों की कीमत →
- ऊपर के सारे दाम स्वतंत्र दुकानों पर दर्ज पूरी हुई बिक्रियों के हैं, 3 अक्टूबर 2026 तक — माँगे गए दाम नहीं। नई बिक्रियाँ जुड़ने पर जुड़े हुए पन्नों की संख्याएँ थोड़ी बदल सकती हैं।
बंद हुए और फटे नोट: क़ानून और RBI क्या कहते हैं
- ₹2000 का नोट: यह अब भी legal tender है, पर बैंक शाखाओं में इसे जमा करने या बदलने की सुविधा 7 अक्टूबर 2023 तक ही थी। अब इसे RBI के 19 निर्गम कार्यालयों (Issue Offices) में बदला जा सकता है — एक बार में ₹20,000 तक — या अपने बैंक खाते में जमा कराया जा सकता है: अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम। किसी भी डाकघर से India Post के ज़रिए इनमें से किसी Issue Office को नोट भेजकर भी रकम अपने खाते में मँगाई जा सकती है। (RBI का ₹2000 नोट FAQ; RBI प्रेस विज्ञप्ति, 1 मई 2026)
- 8 नवंबर 2016 तक चलने वाले पुराने ₹500 और ₹1000 के नोट: आज इन्हें बदलने का कोई रास्ता नहीं है। Specified Bank Notes (Cessation of Liabilities) Act, 2017 में जो मोहलत थी, वह सिर्फ़ उन लोगों के लिए थी जो 9 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 के बीच विदेश में थे (या सरकार की बताई श्रेणियों के लिए), और वह भी 2017 में ख़त्म हो गई। यही क़ानून इन नोटों को जान-बूझकर या अपनी मर्ज़ी से रखने, किसी को देने या किसी से लेने से रोकता है; आम आदमी के लिए छूट सिर्फ़ रखने की है — कुल 10 नोट तक, या अध्ययन, शोध या मुद्राशास्त्र के लिए 25 नोट तक। देने या लेने की कोई छूट नहीं है, इसलिए इन्हें बेचने या ख़रीदने की कोशिश मत कीजिए। उल्लंघन पर जुर्माना ₹10,000 तक या उन नोटों के अंकित मूल्य का पाँच गुना, जो भी ज़्यादा हो। जो कहे कि ये नोट आज भी “बदलवा देगा”, वह झूठ बोल रहा है।
- फटे या गंदे नोट जो अब भी legal tender हैं: RBI के FAQ और नोट बदलने के उसके निर्देशों (Master Direction – Facility for Exchange of Notes and Coins) के मुताबिक़ बैंक शाखाओं को गंदे और कटे-फटे नोट बदलने होते हैं — सिर्फ़ अपने ग्राहकों के नहीं, दूसरों के भी। बहुत जले, भुरभुरे या आपस में चिपके नोट शाखा नहीं लेती; उन्हें RBI Issue Office में देना होता है। ₹2000 के नोट अब सिर्फ़ RBI Issue Office में बदलते या जमा होते हैं (ऊपर देखिए), और नवंबर 2016 में बंद हुए ₹500 व ₹1000 के नोट इस सुविधा में आते ही नहीं।
असली दाम देखिए — माँगा गया नहीं, बिका हुआ
किसी listing पर लिखा दाम वह है जो बेचने वाला माँग रहा है, वह नहीं जो किसी ने दिया। एक बड़ी classifieds साइट पर 1947 के एक ही एक-रुपये के सिक्के की listings लगभग ₹999 से ₹60,00,000 तक फैली मिलीं — ये उम्मीदें हैं, बिक्री नहीं; उसी 1946–47 वाले निकल के रुपये की 11 पूरी हुई बिक्रियों में बीच का दाम ₹199 रहा (चाँदी वाला पन्ना)। 786 वाले नोट भी यही दिखाते हैं: सीरियल के आख़िर में 786 वाले अकेले नोट की 67 पूरी हुई बिक्रियों में बीच का दाम ₹149 रहा, जबकि ऐसे नोटों की listings में बीच का माँगा गया दाम ₹1,025 है — लगभग 7 गुना। इसलिए हमेशा बिकी हुई कीमत देखिए — ऊपर के पन्नों पर “ये असल में कितने में बिके” वाला हिस्सा, और 786 वाले नोट की कीमत। माँगा और बिका दाम अलग क्यों होता है →
ठगी: लाखों का वादा, फिर फ़ीस
यह ठगी आम तौर पर एक ही ढंग से चलती है। कोई वीडियो, विज्ञापन या मैसेज कहता है कि आम सिक्का या नोट लाखों का है; फिर एक “ख़रीदार” बड़ी कीमत पर राज़ी हो जाता है; फिर फ़ीस की सीढ़ी शुरू होती है — पहले registration, फिर processing या courier, फिर GST या TDS, और आख़िर में “RBI clearance” या NOC। मंगलुरु के एक व्यक्ति ने Facebook पर पुराने सिक्के ख़रीदने का विज्ञापन देखा और उसमें दिए WhatsApp नंबर पर अपने 15 सिक्कों की फ़ोटो भेजीं। उनसे ₹49,00,000 का वादा हुआ; फिर ₹750 की “RBI registration” से शुरू होकर GST, बीमा, TDS, GPS, ITR और “RBI notice” के नाम पर रकमें माँगी गईं, और आख़िर में ख़ुद को मुंबई साइबर पुलिस का कमिश्नर बताने वाले एक व्यक्ति ने गिरफ़्तारी की धमकी देकर ₹12,55,000 माँगे। शिकायत के मुताबिक़ 25 नवंबर से 30 दिसंबर 2024 के बीच कुल ₹58,26,399 ठगों के खातों में चले गए (ETV Bharat, 9 जनवरी 2025)। RBI ने 4 अगस्त 2021 की प्रेस विज्ञप्ति में लिखकर कहा है कि वह ऐसे मामलों में पड़ता ही नहीं, कभी कोई शुल्क या कमीशन नहीं माँगता, और उसने किसी संस्था या व्यक्ति को अपनी तरफ़ से वसूली का अधिकार नहीं दिया। यानी RBI न आपका सिक्का ख़रीदता है, न उसके नाम पर कोई फ़ीस होती है। यह ठगी कैसे चलती है → · RBI के अपने शब्द →
बेचना ही है, तो सुरक्षित तरीक़े से
- पहले पहचान, फिर दाम। सिक्का या नोट कितने का है, किस साल का है, और उस पर किसका नाम या चेहरा है — यह लिख लीजिए, और ऊपर के पन्नों पर वैसी ही चीज़ का बिका हुआ दाम देख लीजिए। मन में एक असली संख्या हो, तो बढ़ा-चढ़ा ऑफ़र पहली नज़र में ही खटकने लगता है।
- दोनों तरफ़ की साफ़ फ़ोटो लीजिए। नोट हो तो सीरियल नंबर की एक अलग फ़ोटो भी।
- किसी वीडियो, विज्ञापन या मैसेज में दिए “ख़रीदार के WhatsApp नंबर” पर ख़ुद संपर्क मत कीजिए। ऊपर वाला मंगलुरु मामला ठीक ऐसे ही शुरू हुआ था। जो बात को फ़ोन या WhatsApp पर ले जाने की ज़िद करे, उससे सावधान रहिए — वहाँ कोई संदेशों को जाँचकर आपको चेतावनी नहीं देता। जो भी बात हो, उसके स्क्रीनशॉट सँभालकर रखिए।
- ख़रीदार अपनी UPI id, QR कोड या खाता नंबर भेजे, तो वहीं रुकिए। ख़रीदार को आपकी detail चाहिए, उल्टा नहीं; अपनी detail वह सिर्फ़ इसलिए भेजता है ताकि आप उसे पैसे भेजें। पैसा पाने के लिए न QR कोड स्कैन करना पड़ता है, न UPI PIN डालना — NPCI के मुताबिक़ PIN सिर्फ़ पैसा भेजने के लिए है।
- जल्दी का दबाव रुकने का इशारा है। “सिर्फ़ आज”, “दो घंटे बचे हैं” — जल्दबाज़ी इसीलिए बनाई जाती है कि आप किसी से पूछ न सकें। घर में किसी से बात कर लीजिए।
- The Currency Bazaar पर ख़रीदार साइट की चैट से बात करते हैं और आपका फ़ोन नंबर नहीं दिखाया जाता। जिस मैसेज में पैसे की माँग पकड़ी जाए, उस पर जवाब देने से पहले ही चेतावनी दिखती है, और बिक्री की रकम पर हम कोई कमीशन नहीं लेते — ख़रीदार सीधे आपको भुगतान करता है।
अपने सिक्के और नोट कलेक्टरों तक पहुँचाइए
प्लान का एक बार का शुल्क ₹99 से, इसी साइट के checkout पर — न renewal, बिक्री पर 0% कमीशन। ख़रीदार चैट से बात करते हैं, आपका नंबर छिपा रहता है — और असली ख़रीदार पैसे आपको देता है, आपसे कभी नहीं माँगता।
प्लान देखिए — ₹99 सेइससे जुड़े पेज
अंतिम अपडेट: 2026-10-04