Diwali Safai Me Mile Sikke-Note

Purane sikke aur note mile? क्या करें, क्या न करें

दिवाली की सफ़ाई में दराज़ या पुराने बक्से से सिक्के-नोट निकलें, तो सीधा जवाब यह है: जो आम सिक्का या नोट आज भी चलता है, वह उतने का ही है जितना उस पर लिखा है; और चवन्नी तक के पैसे या आने जैसे बंद हो चुके सिक्के आम तौर पर दसियों से कुछ सौ रुपये में बिकते हैं — लाखों में नहीं। उन्हें साफ़ मत कीजिए, पहले छाँटिए, असली बिक्री का दाम देखिए, और जो ख़रीदार पहले आपसे पैसा माँगे, उससे बात वहीं ख़त्म कीजिए।

पहले: साफ़ या पॉलिश मत कीजिए

पुराने सिक्के कैसे साफ़ करें? सीधा जवाब: मत कीजिए। American Numismatic Association (ANA) के FAQ में “क्या मैं अपने सिक्के साफ़ करूँ?” का छोटा जवाब है: “नहीं!” ANA के मुताबिक़ ग़लत तरीक़े से साफ़ किए गए सिक्के अक्सर अपनी कीमत खो देते हैं, कई बार आधी से भी ज़्यादा। सिक्कों की ग्रेडिंग करने वाली कंपनी NGC ग़लत तरीक़े से साफ़ किए गए सिक्के को 1 से 70 वाला नंबर-ग्रेड नहीं देती, और कहती है कि सफ़ाई को वापस नहीं किया जा सकता। इमली, नींबू, टूथपेस्ट या ब्रश से रगड़ना भी सफ़ाई ही है — सिक्का जैसा मिला है, वैसा ही रहने दीजिए। नोट को इस्त्री मत कीजिए, धोइए मत और टेप मत लगाइए: नोटों की ग्रेडिंग करने वाली PMG “EPQ” (पूरी तरह असली काग़ज़) का दर्जा उसी नोट को देती है जिसे दबाकर, धोकर या किसी और तरीक़े से बेहतर दिखाने की कोशिश न हुई हो। सिक्के और नोट सीधे और सूखी जगह रखिए, और नरम, तेज़ गंध वाली प्लास्टिक (PVC) की थैली में लंबे समय तक मत रखिए — ANA के मुताबिक़ PVC समय के साथ टूटकर एसिड छोड़ता है, जो सिक्के पर हरी चिपचिपी परत बना देता है। जो आम सिक्का या नोट आज भी चलता है, उसके लिए यह सब मायने नहीं रखता — वह अपने अंकित मूल्य का ही है।

फिर छाँटिए: आपके हाथ में असल में क्या है

बंद हुए और फटे नोट: क़ानून और RBI क्या कहते हैं

असली दाम देखिए — माँगा गया नहीं, बिका हुआ

किसी listing पर लिखा दाम वह है जो बेचने वाला माँग रहा है, वह नहीं जो किसी ने दिया। एक बड़ी classifieds साइट पर 1947 के एक ही एक-रुपये के सिक्के की listings लगभग ₹999 से ₹60,00,000 तक फैली मिलीं — ये उम्मीदें हैं, बिक्री नहीं; उसी 1946–47 वाले निकल के रुपये की 11 पूरी हुई बिक्रियों में बीच का दाम ₹199 रहा (चाँदी वाला पन्ना)। 786 वाले नोट भी यही दिखाते हैं: सीरियल के आख़िर में 786 वाले अकेले नोट की 67 पूरी हुई बिक्रियों में बीच का दाम ₹149 रहा, जबकि ऐसे नोटों की listings में बीच का माँगा गया दाम ₹1,025 है — लगभग 7 गुना। इसलिए हमेशा बिकी हुई कीमत देखिए — ऊपर के पन्नों पर “ये असल में कितने में बिके” वाला हिस्सा, और 786 वाले नोट की कीमत। माँगा और बिका दाम अलग क्यों होता है →

ठगी: लाखों का वादा, फिर फ़ीस

यह ठगी आम तौर पर एक ही ढंग से चलती है। कोई वीडियो, विज्ञापन या मैसेज कहता है कि आम सिक्का या नोट लाखों का है; फिर एक “ख़रीदार” बड़ी कीमत पर राज़ी हो जाता है; फिर फ़ीस की सीढ़ी शुरू होती है — पहले registration, फिर processing या courier, फिर GST या TDS, और आख़िर में “RBI clearance” या NOC। मंगलुरु के एक व्यक्ति ने Facebook पर पुराने सिक्के ख़रीदने का विज्ञापन देखा और उसमें दिए WhatsApp नंबर पर अपने 15 सिक्कों की फ़ोटो भेजीं। उनसे ₹49,00,000 का वादा हुआ; फिर ₹750 की “RBI registration” से शुरू होकर GST, बीमा, TDS, GPS, ITR और “RBI notice” के नाम पर रकमें माँगी गईं, और आख़िर में ख़ुद को मुंबई साइबर पुलिस का कमिश्नर बताने वाले एक व्यक्ति ने गिरफ़्तारी की धमकी देकर ₹12,55,000 माँगे। शिकायत के मुताबिक़ 25 नवंबर से 30 दिसंबर 2024 के बीच कुल ₹58,26,399 ठगों के खातों में चले गए (ETV Bharat, 9 जनवरी 2025)। RBI ने 4 अगस्त 2021 की प्रेस विज्ञप्ति में लिखकर कहा है कि वह ऐसे मामलों में पड़ता ही नहीं, कभी कोई शुल्क या कमीशन नहीं माँगता, और उसने किसी संस्था या व्यक्ति को अपनी तरफ़ से वसूली का अधिकार नहीं दिया। यानी RBI न आपका सिक्का ख़रीदता है, न उसके नाम पर कोई फ़ीस होती है। यह ठगी कैसे चलती है → · RBI के अपने शब्द →

असली ख़रीदार बेचने वाले से कभी पैसा नहीं माँगता। न registration, न GST या TDS, न RBI clearance, न export या customs फ़ीस — पैसा सिर्फ़ ख़रीदार से आपकी तरफ़ आता है। और 100 साल या उससे पुराना सिक्का पुरावशेष तथा बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 के तहत पुरावशेष है: उसे सिर्फ़ भारत सरकार या उसकी अधिकृत एजेंसी देश से बाहर भेज सकती है, कोई आम ख़रीदार या विक्रेता नहीं। इसलिए ऐसे सिक्के के लिए “export” या customs फ़ीस की माँग अपने-आप में धोखा है।
पैसे भर चुके हैं? सबसे पहले 1930 (राष्ट्रीय साइबर-अपराध हेल्पलाइन) पर कॉल कीजिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए। फिर नज़दीकी थाने में लिखित शिकायत दीजिए और रसीद संभालकर रखिए। वह मैसेज PIB Fact Check (factcheck.pib.gov.in) को भी भेजिए, ताकि वह ऐसे झूठे दावों की जाँच कर सके। अगर बात इस साइट की किसी चैट में हुई हो, तो उसी बातचीत में Report बटन दबाइए।

बेचना ही है, तो सुरक्षित तरीक़े से

अपने सिक्के और नोट कलेक्टरों तक पहुँचाइए

प्लान का एक बार का शुल्क ₹99 से, इसी साइट के checkout पर — न renewal, बिक्री पर 0% कमीशन। ख़रीदार चैट से बात करते हैं, आपका नंबर छिपा रहता है — और असली ख़रीदार पैसे आपको देता है, आपसे कभी नहीं माँगता।

प्लान देखिए — ₹99 से

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अंतिम अपडेट: 2026-10-04