Sikke Ki Kimat Kya Badhati Hai

सिक्के की कीमत असल में क्या बढ़ाती है?

सबसे आम गलतफ़हमी यही है कि पुराना होना ही कीमती होना है। नहीं है। नीचे वही बातें हैं जो हमारे अपने आँकड़ों में दाम को हिलाती हुई दिखती हैं — और वे जो नहीं हिलातीं।

उम्र अकेले कुछ नहीं करती

1970 के दशक का वह सिक्का जिसे करोड़ों लोगों ने छुआ, आम है — चाहे आज कितना ही पुराना लगे। दुर्लभता तीन चीज़ों से आती है: कितने कम ढले, अच्छी हालत में कितने बचे, और उन्हें कितने लोग चाहते हैं। इनमें से एक भी उम्र नहीं है।

जो सच में बढ़ाती हैं

जो बढ़ाती तो हैं, पर उतना नहीं जितना बताया जाता है

फैंसी नंबर — 786, दोहराते अंक, छोटे नंबर। यह सच में असर डालता है। 2,544 पूरी हुई बिक्री में बीच का असर 1.45 गुना है। नौ में से तीन denominations में फैंसी नोट आम नोट से कम में बिके, क्योंकि वहाँ नोटों के आपसी फ़र्क़ फैंसी के फ़ायदे से बड़े हैं। पूरा आँकड़ा यहाँ

जो कुछ नहीं बढ़ातीं

असली ख़रीदार बेचने वाले से कभी पैसे नहीं माँगता। माँगी गई और बिकी हुई कीमत का फ़र्क़ देखिए।

पैमाना सामने रखिए

हमारे 25,314 दर्ज सौदों में आधे से ज़्यादा ₹500 से नीचे हुए, और सिर्फ़ 23 — यानी 0.09% — ₹1 लाख के ऊपर गए। ऊपर की हर बात इसी पैमाने के भीतर काम करती है।

अपना सिक्का कहाँ खड़ा है, देखिए

हमारी catalogue में हर पहचान का अपना पन्ना है, पूरी हुई बिक्री के दामों के साथ।

बिकी हुई कीमतें देखिए

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अंतिम अपडेट: 2026-09-13