Sikke Ki Kimat Kya Badhati Hai

सिक्के की कीमत असल में क्या बढ़ाती है?

सबसे आम गलतफ़हमी यही है कि पुराना होना ही कीमती होना है। नहीं है। नीचे वही बातें हैं जो हमारे अपने आँकड़ों में दाम को हिलाती हुई दिखती हैं — और वे जो नहीं हिलातीं।

उम्र अकेले कुछ नहीं करती

1970 के दशक का वह सिक्का जिसे करोड़ों लोगों ने छुआ, आम है — चाहे आज कितना ही पुराना लगे। दुर्लभता तीन चीज़ों से आती है: कितने कम ढले, अच्छी हालत में कितने बचे, और उन्हें कितने लोग चाहते हैं। इनमें से एक भी उम्र नहीं है।

जो सच में बढ़ाती हैं

जो बढ़ाती तो हैं, पर उतना नहीं जितना बताया जाता है

फैंसी नंबर — 786, दोहराते अंक, छोटे नंबर। लोग मानते हैं कि यह दाम बढ़ाता है, पर स्वतंत्र दुकानों की बिक्री यह नहीं दिखाती: जिन denominations की तुलना हो सकी (3 अक्टूबर 2026 तक ₹5, ₹20 और ₹100), उन सब में फैंसी नोट आम नोट से कम में बिके। आँकड़े अभी कम हैं, इसलिए इसे अंतिम सच मत मानिए। पूरा आँकड़ा यहाँ।

जो कुछ नहीं बढ़ातीं

असली ख़रीदार बेचने वाले से कभी पैसे नहीं माँगता। माँगी गई और बिकी हुई कीमत का फ़र्क़ देखिए।

पैमाना सामने रखिए

स्वतंत्र दुकानों पर दर्ज हमारी बिक्री में हर चार में से तीन से ज़्यादा ₹500 से नीचे हुईं, और लगभग दो हज़ार में एक ₹1 लाख के ऊपर गई। ऊपर की हर बात इसी पैमाने के भीतर काम करती है।

अपना सिक्का कहाँ खड़ा है, देखिए

हमारी catalogue में हर पहचान का अपना पन्ना है, पूरी हुई बिक्री के दामों के साथ।

बिकी हुई कीमतें देखिए

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अंतिम अपडेट: 2026-10-01