सीधा जवाब, असली बिक्री से

क्या सच में पुराने नोट और सिक्के बिकते हैं?

हाँ, पुराने नोट और सिक्के सच में बिकते हैं — पर ज़्यादातर सैकड़ों रुपये में, लाखों में नहीं। 2026-07-19 से 2026-10-21 के बीच 10 स्वतंत्र सिक्का दुकानों पर सिक्कों और नोटों की 8,267 बिक्रियाँ पूरी हुईं, और उनमें बीच का दाम (median) ₹199 रहा; आधी बिक्रियाँ ₹80 से ₹550 के बीच हुईं। जो कोई आपके आम सिक्के या नोट के लिए लाखों का वादा करे और पहले फ़ीस माँगे, वह ख़रीदार नहीं, ठग है।

किस दाम पर कितनी बिक्रियाँ

ये माँगे गए दाम नहीं हैं। हर पंक्ति वह दाम है जिस पर चीज़ दुकान से हटी — यानी बिक गई। इन्हीं दुकानों पर डाक टिकट, लिफ़ाफ़े, पोस्टकार्ड, कोर्ट-फ़ीस टिकट, माचिस के लेबल और सिक्के रखने का सामान भी बिकता है; वे बिक्रियाँ इनमें नहीं गिनी गईं, क्योंकि सवाल सिक्कों और नोटों का है। पूरा आँकड़ा पुराने सिक्कों की कीमत सूची पर है।

बिक्री का दामकितनी बिक्रियाँहिस्सा
₹100 से कम2,63231.8%
₹100 से ₹4993,43841.6%
₹500 से ₹1,9991,42117.2%
₹2,000 से ₹9,9996357.7%
₹10,000 या उससे ऊपर1411.7%

सिक्के और नोट अलग-अलग देखें तो: 5,284 सिक्कों का बीच का दाम ₹161 रहा (आधे ₹75 से ₹405 के बीच), और 2,983 नोटों का ₹270 (आधे ₹93 से ₹983 के बीच)। नोट का बीच का दाम सिक्के से ऊपर रहता है, पर दोनों में ज़्यादातर बिक्री सैकड़ों रुपये की है।

₹1 लाख या उससे ऊपर क्या गया?

सिर्फ़ 7 — और यही सबसे कम भरोसे वाले आँकड़े हैं। हर एक वह दाम है जो चीज़ के हटते वक़्त दुकान पर लिखा था, और कोई चीज़ बिके बिना भी हट सकती है। इनमें जो साफ़ तौर पर असली बिक्री जैसी दिखती हैं, वे नोट हैं: ब्रिटिश राज के ₹100 के दो नोट, फ़ैंसी नंबर वाले ₹10 के 100 नोटों की पूरी गड्डी, ₹2 के 100 नोटों की गड्डी, और बी. रामा राव के दस्तख़त वाला शुरुआती ₹100 का नोट। बाक़ी दो — “ग्रेड किए 12 सिक्कों” का एक सेट और ₹1 का एक “ग़लती वाला” सिक्का — को बिक्री का सबूत मत मानिए: उन्हीं दिनों उसी दुकान की उसी तरह की लिस्टिंग में 1955 का आम 2 आने का सिक्का ₹78,999 और 2021 का आम ₹5 का सिक्का ₹98,999 पर लिखा था, और ऐसी एक दर्जन से ज़्यादा लिस्टिंग एक ही दिन हट गईं।

यानी ऊँचा दाम ख़ास किस्म, दुर्लभता और हालत से आता है — सिर्फ़ पुराना होने से, या “ग्रेड” की पर्ची लग जाने से नहीं। ग़लती वाले सिक्कों की असल कीमत · गड्डी कितने की बिकती है · फ़ैंसी नंबर की असल कीमत

कौन ख़रीदता है?

तो लाखों के दावे वाले वीडियो और मैसेज का क्या?

वीडियो, विज्ञापन और फ़ॉरवर्ड मैसेज में दिखने वाली बड़ी रकम या तो माँगा गया दाम होती है — जो किसी ने चुकाया नहीं — या ठगी का चारा। ठगी का ढर्रा हर बार एक ही है: पहले आम सिक्के के लिए लाखों का वादा, फिर “registration”, GST, TDS या “RBI clearance” के नाम पर आपसे फ़ीस।

असली ख़रीदार बेचने वाले से कभी पैसा नहीं माँगता। जो पहले फ़ीस माँगे, बात वहीं ख़त्म कीजिए। यह ठगी कैसे चलती है · माँगा और बिका दाम अलग क्यों है

आपका नोट या सिक्का बिकेगा या नहीं, कैसे जानें?

ये आँकड़े 2026-10-21 तक के हैं और हर बार ताज़ा गिने जाते हैं। दुकानों के नाम हम नहीं छापते। हमारी अपनी साइट और हमारी साथी साइट की बिक्री इनमें नहीं गिनी गई, और जहाँ एक ही चीज़ दो बार दर्ज मिली, उसे एक ही बार गिना गया।

अपने जैसे सिक्के या नोट का असली दाम देखिए

हर आम सिक्के का सीधा जवाब, और जिन किस्मों की असली बिक्री दर्ज है, उनका दाम — अनुमान नहीं।

सिक्कों की असली कीमत देखिए

इससे जुड़े पेज

अंतिम अपडेट: 2026-10-05