Purane Note Ki Value Kaise Check Kare

Purane note ki kimat kaise pata kare? 4 कदम में असली जवाब

पुराने नोट की कीमत पता करने का तरीका यह है: नोट की पहचान (कितने रुपये का नोट है, किसके दस्तख़त हैं, कौन सी सीरीज़) और हालत लिखिए, फिर देखिए कि ठीक वैसा ही नोट असल में कितने में बिका — किसी listing या वीडियो में माँगा गया दाम नहीं, पूरी हुई बिक्री का दाम। जो नोट आज भी चलता है और जिसमें कोई ख़ास बात नहीं, वह उतने का ही है जितना उस पर छपा है। और 8 नवंबर 2016 को बंद हुए ₹500 और ₹1000 के नोटों की कोई बिक्री-कीमत होती ही नहीं, क्योंकि क़ानून उन्हें बेचने और ख़रीदने से रोकता है।

पहले यह समझिए: माँगा गया दाम कीमत नहीं है

किसी listing, वीडियो या फ़ॉरवर्ड मैसेज में लिखी रकम वह है जो कोई माँग रहा है — उससे यह पता नहीं चलता कि किसी ने उतना दिया भी। इसलिए हर आँकड़े से दो सवाल पूछिए: यह बिका हुआ दाम है या माँगा हुआ? और यह कितनी बिक्रियों से निकला? जिस आँकड़े के साथ न बिक्री की गिनती हो, न तारीख़, वह किसी की उम्मीद है, बाज़ार का दाम नहीं — चाहे वह किसी ऐप में दिखे या किसी “price list” में। “RBI की तय की हुई कीमत” वाले दावे पर भी मत जाइए: RBI के FAQ के मुताबिक़ वह पुराने नोटों और सिक्कों की ख़रीद-बिक्री के मामलों में पड़ता ही नहीं (RBI के अपने शब्द →)। एक बात और: जेब में चलने वाले आम नोट को आम तौर पर कोई बिक्री के लिए डालता ही नहीं, इसलिए collector सूचियों में दिखने वाले दाम ख़ास किस्मों के होते हैं, आपके आम नोट के नहीं (खुले डेटा में देखिए)। माँगा और बिका दाम अलग क्यों होता है →

4 कदम: अपने नोट की कीमत ख़ुद जाँचिए

कौन सा नोट: सीधा जवाब, और कहाँ मिलाएँ

आपके हाथ मेंसीधा जवाबकहाँ मिलाएँ
आज चलने वाला आम नोट — ₹10, ₹20, ₹50, ₹100, ₹200 या आज वाला ₹500legal tender है, यानी उतने का जितना उस पर छपा है। कोई ख़ास पहचान (पुराना दस्तख़त, पूरी गड्डी) न हो, तो इससे ज़्यादा के दावे पर भरोसा मत कीजिए।₹10 · ₹20 · ₹100 · ₹500 के नोट की कीमत
₹1, ₹2 या ₹5 का पुराना नोटबंद नहीं हुआ। ₹2 और ₹5 के नोटों की छपाई रुकी है, पर पहले जारी नोट legal tender हैं; भारत सरकार के ₹1 के नोट भी, पुराने समेत (RBI FAQ)। ज़्यादा दाम सिर्फ़ कुछ ख़ास पुरानी किस्मों का है।₹1 · ₹2 · ₹5 के नोट की कीमत
पुराने गवर्नर के दस्तख़त वाला नोटदस्तख़त नोट का दौर बताता है। एक ही मूल्य के भीतर सबसे पुराने दस्तख़त वाले आम नोट सबसे नए वालों से कई गुना दाम पर बिके — पर तुलना हमेशा उसी मूल्य के नोट से कीजिए।नोट पर दस्तख़त की असल कीमत
100 नोटों की पूरी गड्डीगड्डी एक चीज़ की तरह बिकती है: जितने ज़्यादा नोट साथ, हर नोट उतना कम लाता है। अकेले नोट के दाम को 100 से गुणा मत कीजिए।नोटों की गड्डी कितने की बिकती है
8 नवंबर 2016 को बंद हुआ पुराना ₹500 या ₹1000 — 2016 से पहले की किसी भी सीरीज़ का (1987 वाला ₹500 भी)legal tender नहीं, और बेचना-ख़रीदना क़ानूनन मना है — इसलिए इसकी कोई बिक्री-कीमत नहीं। नीचे देखिए।₹500 के नोट का पूरा जवाब
₹2000 का नोटअब भी legal tender है (RBI FAQ), यानी पूरे ₹2000 का।बदलने या जमा करने का रास्ता: पुराने सिक्के और नोट का क्या करें

नवंबर 2016 में बंद हुए ₹500 और ₹1000: सवाल कीमत का नहीं, क़ानून का

8 नवंबर 2016 तक चल रहे जो ₹500 और ₹1000 के नोट उस रात 12 बजे से legal tender नहीं रहे — चाहे किसी भी सीरीज़ के हों, 1987 में आया गांधी के चित्र और अशोक स्तंभ के वॉटरमार्क वाला ₹500 भी — उनकी कीमत पता करने का सवाल ही नहीं उठता। Specified Bank Notes (Cessation of Liabilities) Act, 2017 की धारा 5 — जिसे RBI ने अपने FAQ में ज्यों का त्यों छापा है — कहती है कि कोई भी व्यक्ति ये नोट जानते-बूझते या अपनी मर्ज़ी से न रखे, न किसी को दे, न किसी से ले। आम आदमी के लिए छूट सिर्फ़ रखने की है: कुल 10 नोट तक, चाहे किसी भी मूल्य के हों, या अध्ययन, शोध या मुद्राशास्त्र (numismatics) के लिए 25 नोट तक। बेचने, ख़रीदने या किसी को सौंपने की कोई छूट नहीं है। इसी क़ानून की धारा 7 के तहत धारा 5 के किसी भी उल्लंघन पर — छूट से ज़्यादा नोट रखना हो, या ये नोट किसी को देना या किसी से लेना (बेचना-ख़रीदना भी इसी में आता है) — जुर्माना ₹10,000 तक या उन नोटों के अंकित मूल्य का पाँच गुना, जो भी ज़्यादा हो, लग सकता है। इसलिए इन्हें न किसी listing पर डालिए, न किसी “ख़रीदार” को भेजिए। जो इनका दाम लगाए, वह आपसे यही क़ानून तुड़वा रहा है; और जो इन्हें “बदलवाने” के नाम पर पहले फ़ीस माँगे, वह वही ठगी कर रहा है जो नीचे बताई गई है। जनवरी 1946 और जनवरी 1978 में बंद हुए बड़े नोटों पर यह पन्ना कोई राय नहीं देता।

फ़ीस माँगने वाला “ख़रीदार” या “RBI अफ़सर” ठग है

असली ख़रीदार बेचने वाले से कभी पैसा नहीं माँगता। कोई ख़रीदार, कोई “agent” या ख़ुद को RBI का अफ़सर बताने वाला कोई व्यक्ति कहे कि पहले valuation, certificate या registration की फ़ीस भरिए, फिर नोट के बड़े पैसे मिलेंगे — तो बात वहीं ख़त्म कीजिए; सौदे में पैसा सिर्फ़ ख़रीदार से आपकी तरफ़ आता है। RBI की 4 अगस्त 2021 की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ वह न ऐसे सौदों में पड़ता है, न इनके लिए कभी कोई शुल्क या कमीशन माँगता है, और न उसने किसी को अपनी ओर से ऐसी वसूली का हक़ दिया है। पैसे जा चुके हों तो 1930 (राष्ट्रीय साइबर-अपराध हेल्पलाइन) पर कॉल कीजिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए। यह ठगी कैसे चलती है →

नोट बेचना है? सीधे कलेक्टरों तक पहुँचाइए

प्लान का एक बार का शुल्क ₹99 से, और बिक्री पर 0% कमीशन। ख़रीदार साइट की चैट से बात करते हैं, आपका फ़ोन नंबर नहीं दिखाया जाता, और जिस मैसेज में फ़ीस या पैसे की माँग पकड़ी जाए, उस पर चेतावनी दिखती है।

प्लान देखिए — ₹99 से

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अंतिम अपडेट: 2026-10-04