असली कीमत, वायरल वाली नहीं

₹10 के सिक्के की कीमत — क्या सच में ₹3 लाख?

₹10 के सिक्के के साथ एक अलग अफ़वाह जुड़ी है, और उसे पहले निपटाना ज़रूरी है — क्योंकि ठगी अक्सर यही कहकर शुरू होती है कि आपका सिक्का बेकार होने वाला है।

छोटा जवाब: नहीं।
आम ₹10 का सिक्का ₹10 का ही है। वह legal tender है, इसलिए उतने का ही है जितना उस पर लिखा है। कुछ ख़ास किस्मों की कलेक्टर कीमत ज़रूर होती है — असली रेंज नीचे, हमारी अपनी catalogue से।

ख़ास तौर पर ₹10 का सिक्का

₹10 का सिक्का बंद नहीं हुआ है। RBI ने इसे एक दर्जन से ज़्यादा डिज़ाइनों में जारी किया है और सार्वजनिक रूप से दोहराया है कि वे सभी legal tender हैं और लेन-देन में स्वीकार किए जाने चाहिए। यह कहना इसलिए पड़ा क्योंकि दुकानदार अनजान डिज़ाइन देखकर उन्हें नकली समझकर लेने से मना कर रहे थे।

यह अफ़वाह और “लाखों का है” वाला दावा जोड़ी बनाकर चलते हैं। पहले बताया जाता है कि सिक्का वापस लिया जा रहा है, इसलिए हटा दीजिए; फिर कि वह छिपे तौर पर कीमती है, इसलिए किसी ख़ास आदमी को बेच दीजिए। दोनों बातें झूठ हैं, और दोनों एक ही तरफ़ से आती हैं।

असली कलेक्टर दिलचस्पी पुराने commemorative ₹10 सिक्कों में है, अभी चल रहे दो-धातु वाले सिक्के में नहीं। नीचे हमारी catalogue की entry उन्हीं में से एक है।

जिन किस्मों की सचमुच ज़्यादा कीमत है

किस्म असली रेंज
Ten Rupees — FAO (1970) ₹700 – ₹3,800

हमारी प्रकाशित value catalogue से — ये रेंज इन्हीं ख़ास किस्मों की हैं, आम चलन वाले ₹10 के सिक्के की नहीं।

एक जाँच हर मामला तय कर देती है: असली खरीदार बेचने वाले से कभी पैसा नहीं माँगता। देखिए RBI क्या कहता है और माँगी गई कीमत क्यों भ्रमित करती है

ये असल में कितने में बिके

स्वतंत्र सिक्का दुकानों पर दर्ज पूरी हुई बिक्री — माँगी गई कीमत नहीं। इनमें से हर एक 10 रुपये के सिक्के की एक ख़ास किस्म है।

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फिर भी अपना ₹10 का सिक्का बेचना है?

बेचने के लिए आप किसी को पैसा नहीं देते — न रजिस्ट्रेशन फ़ीस, न कस्टम क्लीयरेंस, न GST, न कोई रिफ़ंडेबल जमा। जो पहले पैसे माँगे, वही ठग है। यहाँ पूरी क़ीमत आपकी रहती है — हम उस पर कोई कमीशन नहीं लेते।

अपना ₹10 का सिक्का लगाइए